2/07/2008

सुनो सूअरों, ये गंदी लड़की है

बहुत दिनों से ब्लाग व्लाग पढ़ रही थी। सोच रही थी अपना भी एक कोना ब्लाग में होना चाहिए। पहले भड़ास में मेंबर बनी। वहां मर्दों की भीड़ में खुद को डरी डरी और केवल मूकदर्शक पाती थी। फिर उससे अलग हो गई। सोचने लगी क्यों नहीं मैं जैसी हूं, वैसी लड़कियों-स्त्रियों के लिए एक ब्लाग बना लूं। तो आज यह ब्लाग बना डाला। गंदी लड़की नाम से। और इसमें गंदी नाम से मैं लिखूंगी।

थोड़ा अपने बारे में बता दूं। दिल्ली में हूं, छात्रा हूं। हायर एजुकेशन में। कोई टेंशन नहीं है। मजे में जी रही हूं, अपनी स्टाइल में। अपनी मर्जी से। जाने कितने प्रेमी बदल दिए। जो सूअर गुर्राता या टर्राता है या नखरे दिखाता है, या जिस सूअर की शक्ल खराब लगने लगती है, उसे चार गाली देकर, लात मार कर भगा देती हूं। जब तक जी चाहता है इन मर्दों से खेलती हूं, मूर्ख बनाती हूं, कुत्ते की तरह उन्हें रखती हूं। हाथ पैर जुड़वाती हूं और जब जी भर जाता है, तब जा बे कुत्ते.....के अंदाज में दुर दुर करके भगा देती हूं।

बड़े आराम से तुम ससुरों-सूअरों मुझे यह बात कह सकते हो कि ये तो गंदी है, व्यभिचारी है, रंडी है, वेश्या है, बदचलन है, जाने क्या क्या है....पर इन शब्दों का अब कोई मतलब नहीं रहा। ये सब तुम लोग हो क्योंकि हम औरतें, लड़कियां कभी रंडी, वेश्या, बदचलन और व्यभिचारी हो ही नहीं सकतीं। ये हमेशा से पुरुष और मर्द रहे हैं और आज भी हैं।

हां, हम गंदी लड़कियां जरूर हैं जो अपने हिसाब से जीती हैं और वो सब कुछ सोचती और करती हैं जिसे तुम सब मर्यादा के दायरे से बाहर बताते हो। किसी की चाल या जाल में फंसती नहीं बल्कि फांसती हैं। हम बुरी और गंदी लड़कियां हैं।

मैं सभी स्त्रियों की बात नहीं कर रही। दिक्कतें अभी बहुत हैं। पर मैं अपने जैसी लड़कियों, स्त्रियों की बात कर रही हूं जो अपने अंदाज़ में जीने की तमन्ना रखती हैं और जीती भी हैं। मर्दों-पुरुषों को दोयम बनाकर रखती हैं। बराबरी पर इसलिए नहीं रखतीं क्योंकि बराबरी पर रखने पर ये एक दर्जे और उपर जाना चाहते हैं और स्त्री बेचारी फिर दोयम हो जाती है। इसलिए इन्हें मैं हमेशा दोयम दर्जे पर रखती हूं। सारे काम कराती हूं, सारे नखरे दिखाती हूं और उसके बाद चार गाली भी देती हूं।

दिमाग मेरे पास है। पढ़ाई के लिए सरकार से पैसे मिल जाते हैं और घर से पापा भी खूब देते हैं, इसलिए पैसे की कोई दिक्कत नहीं। तो इन सूअर पुरुषों को अपने से नीचे रखने में जाता क्या है, उलटे मजा आता है। लगता है, देखो, इन बेचारों को, यही तो हम लोगों के बास बन जाते हैं और जीवन के भाग्यविधाता भी हो जाते हैं। घूंसे, लात, ताने, बंदिशें, उलाहने, किचन, बच्चे, परिवार, मर्यादा....इन्हीं सब के बीच अभी अधिकतर लड़कियों-स्त्रियों का जीवन बीत रहा है पर हम जैसी गंदी लड़कियां चाहती हैं कि सभी लड़कियां और स्त्रियां गंदी हो जाएं ताकि ये सुअर हमसे कोई उम्मीद ही न कर सकें।

बहुत कुछ लिखना है इस गंदी लड़की को, जितना अब तक झेला है और जितना अब तक दिया है। इस ब्लाग को बनाकर मुझे बड़ा संतोष हो रहा है।

मैं असली नाम से इसलिए नहीं लिख रही हूं क्योंकि सुअरों का थोड़ा डर है। कल को बवाल हो सकता है, बदनामी हो सकती है, शिकायत घर पहुंच सकती है, मम्मी-पापा को मेरी इस हरकत के बारे में बताया जा सकता है। इसलिए मैं चाहती हूं कि गंदी लड़कियों को गुमनाम नाम से ही इस ब्लाग पर इकट्ठी करूं और फिर अपनी अपनी गंदी बातें इसमें शेयर किया जाए। ये गंदी बातें उन सुअरों के बारे में होगी जिन्हें हम अपनी जूतियों पे रखते हैं। आगे भी ज़िंदगी में किसी सूअर की गुलामी करने के बजाय सुअरों को अपना गुलाम बनाकर रखने का इरादा है।

कोशिश है कि गंदी लड़कियों की बातें से अच्छी स्त्रियों और अच्छी लड़कियां गंदी बनने को प्रेरित हों ताकि सुअरों को शऊर सिखाया जा सके।

जो भी लड़की गंदी बनना चाहती है, गंदी बातें बताना चाहती है, वो यहां जरूर आए और बताए।

मैं हूं
गंदी

16 comments:

Anonymous said...

वाह आप तो सचमुच बहुत ही स्वनामध्न्या हैं ! आप क्या वाकई स्त्री हैं या कि पुरुष ?? और हां स्त्री विमर्ष के नाम पर निजी कुंठा या भडास आपके संघर्ष ? को हास्यास्पद बना रही है !

मनीष सहाय said...

बस एक बात का ध्यान रखियेगा, ताज़िन्दगी इस को रहस्य ही रहने दीजियेगा. कभी भी, ज़िन्दगी के किसी नाज़ुक मोड पर, या कभी एक मनचाहा लम्हा पा कर भी, अपने आप पर पूरा विश्वास रखे हुए रहना, और कभी भी ना हारना, कभी भी, किसी से भी नहीं, यहां तक के अपने आप से भी नहीं. तुम्हारी हिम्मत को मैं साधुवाद देता हूं, और कामना करता हूं के सिर्फ़ पुरुषों के मनोरन्जन के काम ना आने पाये ये गन्दापन, बस जिओ जी भर के

Anonymous said...

गंदी लड़की,
आज अनजाने में ही तुम्हारा ब्लॉग पढ़ा...पहले तो कुछ समझ में नही आया...बाद में तुम्हारी गंदगी पर थोड़ी चर्चा की गई....और उस चर्चा का सार ये निकल कर सामने आया...कि तुम्हारे गंदे बनने के पीछे वास्तव में तुम्हारा कोई योगदान नहीं हैं....देखा जाए तो ये तुम्हारी परवरिश में खामियों का नतीजा हैं...मैं तुमसे काफी हद तक सहमत हूं कि औरत को आज भी सामान समझकर इस्तेमाल किया जाता हैं...लेकिन इसका ये मतलब कतई नहीं हैं....इसके बदले हर लड़की कपड़े खोलकर बाजार में उतर आए..वैसे जहां तक मैने तुम्हे पढ़ा हैं...उससे मुझे ये लगता हैं कि तुम्हारे परिवार में सोच का गंदापन पहले से ही मौजूद हैं....जिसकी वजह से तुम दिमागी रुप से बीमार हो गई....या तो तुम्हारी मां ऐसी रही होगी...जिसके बहुत से पुरुषो के साथ दैहिक संबध रहे होगें....या फिर कोई ना कोई कमी तुम्हारे पिता में रही होगीं....हो सकता हैं तुमने अपने पिता को परस्त्री गमन करते देखा हो...तुम्हारे नजरिए से समाज का संचालन कदाचित नही हो सकता....इस वक्त तुम्हे एक मनोचिकित्सक की जरुरत हैं....मैं तुम्हारी इस बात से बिल्कुल सहमत नहीं हूं.....कि समाज में स्त्री और पुरुषो को बराबर समझा जाना चाहिए.....जब कुदरत ने औरत और आदमी को अलग अलग बनाया हैं...तो तुम जैसी गंदगी या फिर कोई और दोनो को बराबर कैसे समझ सकता हैं....और दोनो के बीच का फर्क निसंदेह काफी खूबसूरत हैं...दोनो को एक दूसरे की जरुरत हैं...अगर लड़को के लिंग काट दिए जाए तो फिर तुम या तुम्हारी माता बिन लिंग के क्या कर पाओगी...मैं मानता हू कि समाज में स्त्रियों को लेकर काफी समस्याएं हैं...लेकिन उनका बुनियादी हल ढूंढना होगा...और समझदारी के जरिए वो खाई पाटनी होगी...जिसे समाज के गंदे रीति रिवाजो ने खड़ी की हैं....वर्ना तुम जैसी गंदी पैदाईश से समाज को हमेशा दो चार होना पड़ेगा...इसलिए अपनी गंदगी पर लगाम लगाओ..वर्ना ये भी मुमकिन हैं कि तुम्हारी हैवानिय़त के चलते एक दिन तुम अपने ही भाई और पिता का लिंग काटकर उन्हे खा जाओ।
एक अजनबी।

Anonymous said...

प्रिय गंदी लड़की.....
कैसी हो ....देखो बच्ची तुम गजब सोचती हो....तुम जैसा तो किसी लड़की ने आज तक सोचा भी नहीं होगा...तुम तो इन मादरचौदों का लिंग काटो अभियान जारी रखो....सबसे पहले अपने पिता का लिंग काटो .....फिर अपने भाई का ....फिर जीजा का ....अगर सगा जीजा नहीं है तो अपनी सहेली के जीजा का ही काट डालो....लेकिन काटो जरूर...लिंग काटने का मजा ही कुछ और है...इसे भी दिल ना भरे तो अपने सर का काटो ....फिर पड़ौसी का ....फिर पड़ौसी के पड़ौसी का..फिर अपने मुहल्ले के जितने भी मर्द है सभी को एक सामुहिक भोज में बुलाओ औऱ सबका काट डालो.....जिओ कन्या जिओ ...क्या अभियान शुरू किया है ...

Anonymous said...

rmesh sharma sonkhara--------------[gandi ladki] ajj itni battamiz ladkiya bhi ho sakti hai jo purush se maje bager rah nahi sakti usi ke sath janbaroooooo kaissaaaaaa salookkkkkkkkk toba-otba chichiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

Anonymous said...

o baddimag kya tu bholi hai pagal.so i hate you dutt teri ki[gunjan]

Anonymous said...

क्या कहने ! इस गन्दी लड़की के, .................अबे ! तू लड़की है या लड़का ......... किसी लड़की के तो ऐसे विचार हो नही सकते, क्योंकि लडकियां भावुक होती है और भावुक न हो तो फिर लड़की कैसी ? मेरे ख्याल से तुम कोई मानसिक रोगी हो ......... अपना इलाज करा यार, और लड़को के लंड कटेगी...... तो अपनी चूत में क्या गाज़र डालेगी ? तू दुसरो को बाद में सुधारना........ अच्छा ऐसे कर तू ही वो सब कर जिसको दूसरी लड़कियों से कहती है, मसलन छोटे कपड़े पहन छोटे क्या तू तो बिकनी में घूम, फिर बता तेरे पापा का तुझे देखकर खड़ा होता है या नही, अगर होता है तो सबसे पहले उन्ही का लंड........ समझ गई होगी ! जरा सोच के देख तेरी लड़की अधनंगी घूमे तो तुझे कैसा लगेगा, इस दुनिया में इंसान भी एक जानवर के जेसा ही है, लेकिन इंसान के पास दिमाग था, इसीलिए संस्कृति और रीती-रिवाज जैसे चीजे बनाई गई ताकि लोग अपनी सेक्स की भावना पर काबू कर सकें, नियम केवल लड़कियों के लिए ही नही है बल्कि पुरषों के लिए भी है, पहले कुछ संस्कार सीख जो तुझे अपने घर से नही मिले, उसके बाद सोच की तो जो कहती है वो कितना सच है ! ...... और ये उट-पटांग बातें लिखकर ये मसूस न करा की तेरे साथ-साथ तेरा प....... भी गन्दा है, ख़ुद को गन्दी कहने में गर्व महसूस हो रहा है, कल को कोई तेरी बेटी को भी g..... कहे तो कैसा लगेगा ?

Ganesh Prasad said...

हेल्लो बीमार लड़की,

मेरे ख्याल से तू अपने इलाज करवा, या फिर ओपन होकर एक नंगा नाच कर बिच चौराहे पर, और अपनी जमात को बड़ा कर
या फिर एक दिन अपने पापा से अकेले में मिल और उनसे प्यार से पूछ पापा आपने क्यों मुझे ऐसा बना दिया...

मुन्नी, तुझे किलोमीटर में कितने मीटर होते है पता है, लम्बाई, चौडाई क्या होती है पता.. है ??. सायद नहीं... तो एक काम कर और गूगल के हेल्प से दुनिया का पता कर कितनी बड़ी है दुनिया... कुए की चुद्दकर मेंढकनि... कुए से बहार निकल और देख दुनिया बहुत बड़ी है.... दुनिया में सिर्फ वोही लोग नहीं है जिन्होंने तुझे ऐसा बनाया ! पान के दुकान के पास खड़े तीन लडके के अलावा तू सच सच बता उस दिन कितने लडके तेरे आस पास से गुजरे होंगे... सायद अगर तू १० किलोमीटर का भी सफ़र तय की होगी तो 10x10 = 100 लडके इसका मतलब 100-3 = 97 लडके तो ठीक है न? क्योंकी तेरी ही आपबीती है और तुने ही सिर्फ तीन लड़को का जिक्र किया है...

सबका लंड ही काट देगी तो फिर तेरी जैसीयो का सेक्स का भूख कौन मिटाएगा और फिर तेरी जैसी जमात कहा से पैदा होगी... सच सच बता ... ब्लू फिल्म तो तू जरुर देखती होग १००% देखती ही होगी, बिलकुल ठीक कोई बुराई नहीं है ब्लू फिल्म देखने में खूब देख अगर मन मने तो पर एक बात सच सच बोलना फिल्मे देखते हुए क्या तू भी कोई तगडा लं*** लेने का नहीं सोचती होगी..??. तो फिर लंड कटाने का ख्याल... हा बलात्कार करने को सजा देने की लिए उनको बिच चौहरे पर खडा कर उनको भी जिन्दा जला देने का होना चाहिए...

और हा जहा तू हॉस्टल में रहती है.. वहा की लड़कियों को लड़की ही बना रहने दे... उनको जीनत अमन और गन्दी लड़की न बनाना... उनके पापा, उनके भाई, उनके चाचा, सायद उनकी मम्मी तेरे अपनो जैसी नहीं होगी....तुझे गटर की और सड कर जीने की जिंदगी मुबारक... दूसरो को जीने की कला सिखा... क्योंकी प्रकृति के भी अपने कुछ अनुपात है.... और अपने कुछ नियम है..... और .... हम उसके पूरक.... फूल और माली ...

viruslover said...

आज हिंदी ब्लोग्स तलाशते हुए आपके आपके ब्लोग्स पर नजर पड़ी मजा आगया कुछ आश्चर्य भी हुआ की समाज मैं आप जैसी हिम्मत वाली लड़कियां भी पैदा होती मैं भी चाहूँगा की कोई आप जैसी (गन्दी ही सही)लड़की मेरी जीवन संगिनी बने जो मेरे होने पर या मेरे न होने पर भी समाज से लड़कर अपने अधिकार मनवा ले अपनी बात प्रस्तुत कर दे लोगो को विवास करे अपनी तरफ देखने को और भविष्य मैं जब पिता बनाने का अवसर ईश्वर दे तो वोह आप जैसी संतान का पिता बनाये मुझे हमेशा गर्व रहेगा
आप का एक नया साथी

divya said...

tum vastav men gandi hi nahi ek nmber ki laund baaj ho...
dimag ka ilaj karao..!

texniteshlpap said...

अति हर चीज़ की बुरी होती है. मेरा ख्याल है मिस गन्दी ने समय से पहले और ज़रूरत से ज्यादा यौन सम्बन्ध बनाये हैं जिस वजह से उन्हें हर कोई सूअर नज़र आ रहा है ठीक वैसे जैसे शक्कर ज्यादा खाने पर कडवी लगने लगती है. गन्दी जी, दुनिया में हर तरह के लोग रहते हैं. हर कोई रोगी नहीं होता उसी तरह हर कोई भोगी भी नहीं होता. ये अलग बात है कि आपका पाला सिर्फ कुत्ते, सूअर किस्म के आवारा लडको से पड़ा है, जिनके ख्याल में लड़की की जगह जूतों में होती है. ऐसे लोगों के लिए आपका "जा बे कुत्ते" वाला व्यवहार एकदम सही है. ऐसे लोग औरतो को सिर्फ घूंसे, लात, ताने, बंदिशें, उलाहने देते हैं और इतना बुरा व्यव्हार भी करते हैं जो आपने कभी देखा भी नहीं होगा. पर ज़रा सोचिये, ब्लॉग पर गालियों का अम्बार लगा देने से क्या बदहाल औरतो की हालत में सुधार आ जायेगा? और क्या उनपर ज़ुल्म करने वाले हाथ कट जायेंगे?

आपके पास दिमाग है, पैसा भी है, तो थोडा दिल से भी काम लीजिये और ऐसी औरतो के लिए कुछ प्रेक्टिकल करके दिखाइये - ऐसा कुछ जो न सरकार कर पाई हो, न कोई और कर पाया हो. तब आपको अपना नाम छुपाने की भी कोशिश नहीं करनी पड़ेगी.

आगे मेरा मानना है कि आप लडकियों की हायर एजुकेशन के खिलाफ हैं. पूछिए कैसे? जो भी बन्दा आपका ये ब्लॉग पढ़ेगा सीधे ये मान बैठेगा कि लड़की को हायर एजुकेशन देना उसको "गन्दी लड़की" बनाने की ट्रेनिंग देने के बराबर है. जानती हैं आप कितनी लडकियों के करियर को शुरू होने से पहले ख़त्म कर रही हैं?

Anonymous said...

Bahut hi achcha blog hain

तोताराम said...

मिस रंडी सारी सारी गंदी जी,
आपका ब्लाग पढा, आपकी मानसिकता बीमार है किसी अच्छे से मनोवैज्ञानिक से अपना इलाज करवायें, फ़िर भि ठीक ना हो तो मेरे पास आयें, मै आपको इतना चोदुँगा इतना चोदुँगा कि लड़कों के खिलाफ़ आपकी सारी शिकायतें दूर हो जायेंगी।

आपका ही,
तोताराम

sandeep said...

mai kya bolun aapko
agar aap itane logo ka comment sacche dil se padhi hongi to aapko apni galti ka ahsas hua hoga.are ab to band kar do ye sab, kuch aisa kar ki sab is blog ko padhe aur shabashi den .gali khane wala kam chod do madam .'
nahi ti age chal ke bahut bura din ane wale hai....

Anonymous said...

bewkoof ladki prostitude tujh jaisi ladkiyaan hoti hein jo ldkon ko phansa kar unse paise ainthti hein or badnaam ladke hote hein or tum jaisi ladkiyaan apni jaruraton ko pura karne k liye unhe patati hein or unse paise lrti hein iske badle mai ladkon se chudti hein .sochti hein kya jayega chudne k baad phir waise hi kuch ja to rha ni hai chudlo kya hai yum jaison ne hi samaaj ko kharaab kar rakha hai tumeh to beech chaurahe par nanga krke chod dena chahiye ki paise do or chodo

Anonymous said...

आपके विचार सही नहीं है ।
क्या आप कभी अकेली सुई से सिलाई कर सकती है?
नही !! कभी नहीं कर सकती
आपको धागा लेना ही पड़ेगा,
यही बात धागे पर भी लागू होती है ।
समाज में हर तरह के लोग हैं, पर नजरिया तो आप ही का है , कि आप उसे किस नजर से देखती है।
आप सोच रही होगी कि आप सबसे खेल रही हैं, पर खेलने का सामान भी तो खुद ही बन रही हैं ।
आपको आत्मचिंतन की आवश्यकता है