2/16/2008

ये कथित प्रगतिशील ही हैं यौन शुचिता के सबसे बड़े लठैत

एक मुहलगे लड़के दोस्त ने पूछा- लड़कियां कम कपड़े क्यों पहनती हैं, मतलब वो नाभि, पेट आदि दिखाती हैं। मैंने कहा, इसलिए क्योंकि तेरे दिमाग में जो जहर घुसा है, उसके देह को लेकर वो थोड़ा कम हो और तू जान सके कि उसका भी शरीर वैसा ही होता है जैसा तेरा होता है। वही मांस, वही हड्डियां, वही सब कुछ। बस बच्चा पैदा करने के लिए भगवान ने एक अतिरिक्त सुविधा दे रखी है जिसके लिए तुम लोग पागल रहते हो और लड़कियों की जान ले लेतो हो। वो लड़का एक पल को सकपकाया, फिर बोला.....अब तो तुम लोगों का जमाना आ गया है। जहां देखो महिलओं के हित में बातें होती हैं। मैंने कहा, हां, अभी तो वो दिन आएगा जब लड़कियां मिलकर, घेर घेर कर लड़कों की इज्जत लूटेंगी। जब तक वो दौर नहीं आएगा तब तक लड़कियों-महिलाओं का जमाना आना नहीं माना जाएगा। अभी तो शुरुवात है, देखतो रहो। अब जो लड़कियां आ रही हैं, वो दिल-दिमाग से बिलकुल आक्रामक, तेज तर्रार, दूरदर्शी और ज्ञानवान हैं। इन्हें अपने देह की फिक्र नहीं रहती क्योंकि ये जानती हैं कि ये देह तो बस उसी तरह है जैसे बाकी सबकी देह होती है, लेकिन सारा खेल तो दिमाग का है। देह से उबरने के लिए, उबारने के लिए जरूरी है कि दिमाग का भरपूर इस्तेमाल किया जाए। ये लड़कियों की नई जनरेशन इसी दिमाग का इस्तेमाल कर देह के प्रति भूखे लोगों को हरा रही हैं।

तुम भी, सब करो, लेकिन दिमाग का इस्तेमाल करो। सफल हो जाओ, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो जाओ, बाकी देखो, जमाना किस तरह तुम्हारे कदमों को चूमेगा। लड़कियों की सबसे बड़ी जरूरत है उनका आत्मनिर्भर होना। अगर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता नहीं है तो पुरुष न सिर्फ दोयम दर्जे पर रखेगा, बल्कि देह के प्रति सावधान रखेगा, देह को नोचेगा और देह दिखने पर पीटेगा। ये दोगले पुरुष सिर्फ बातें करते हैं महिला तरक्की की लेकिन ये अपने घरों में यौन शुचिता के सबसे बड़े लठैत हैं।

गंदी लड़कियों, सहेलियों, साथिनों, दोस्तों, आप लोग दिमाग लगाएं, लड़ाएं, मिलाएं और इन पुरुषों के गंदेपने से निपटने के लिए इनके जैसे गंदे बन जाओ। इन सूअरों को मूर्ख बनाते रहो, इनका इस्तेमाल करते रहो और खुद आगे बढ़ते रहो। लेकिन ध्यान रहे, इस प्रक्रिया में कहीं ये तुम्हारा इस्तेमाल न कर ले। जो करो, अपने दिमाग का इस्तेमाल करके करो। योनि की सलामती और छुईमुई बनकर रहना, कमनीयता, स्त्रैण....ये सब बातें बकवास हैं....। इनका कोई मतलब नहीं। बिना गंदी बने, अच्छा नहीं बना जा सकता।
तुम्हारी
गंदी

2 comments:

tuntun dwivedi said...

Hamein to lot liya milke boor valiyo ne kale- kale jhato ne gol-gol chuchiyo ne.....

tuntun dwivedi said...

kya mai aap se mil sakata hu, mai aap ki sabhi bato ka tahe dil se samman karata hu